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पूर्वोत्तर (एन.ई.) प्रभाग

यह प्रभाग पूर्वोत्तर राज्यों में आंतरिक सुरक्षा और कानून व व्यवस्था की स्थिति से संबंधित कार्यों के साथ उस क्षेत्र में सक्रिय विभिन्न उग्रवादी समूहों के विद्रोह से निपटना और ऐसे समूहों के साथ शांति वार्ता से संबंधित मामलों को देखता है।

पूर्वोत्तर की तुलनात्मक स्थिति

पूर्वोत्तर की तुलनात्मक स्थिति
राज्य जनसंख्या (वर्ष 2019 की जनगणना के अनुसार) क्षेत्र (वर्ग किलोमीटर) प्रतिशत अखिल भारतीय जनसंख्या का घनत्व(प्रति वर्ग किलोमीटर)
      जनसंख्या क्षेत्र  
अरुणाचल प्रदेश 13,83,727 83,743 0.11% 2.55% 17
असम 3,12,05,576 78,438 2.58% 2.39% 398
मणिपुर 28,55,794 22,327 0.24% 0.68% 115
मेघालय 29,66,889 22,429 0.25% 0.68% 132
मिजोरम 10,97,206 21,081 0.09% 0.64% 52
नागालैण्ड 19,78,502 16,579 0.16% 0.50% 119
सिक्किम 6,10,577 7,096 0.05% 0.22% 86
त्रिपुरा 36,73,917 10,486 0.30% 0.32% 350
कुल पूर्वोत्तर 4,57,72,188 2,62,179 3.78% 7.98% 173
अखिल भारत 1,21,08,54,977 32,87,263     382
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गैर-कानूनी कार्यकलाप (निवारण) अधिनियम (यूएपीए) 1967 के अंतर्गत अधिसूचना

गैर-कानूनी कार्यकलाप (निवारण) अधिनियम (यूएपीए) 1967 के अंतर्गत अधिसूचना
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सशस्‍त्र बल (विशेष शक्ति) अधिनियम, 1958 के अंतर्गत अधिसूचना

सशस्‍त्र बल (विशेष शक्ति) अधिनियम, 1958 के अंतर्गत अधिसूचना
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पूर्वोत्तर प्रभाग द्वारा देखे जाने वाले कुछ महत्वपूर्ण विषय

पूर्वोत्तर प्रभाग द्वारा देखे जाने वाले कुछ महत्वपूर्ण विषय
  • पूर्वोत्तर राज्यों में विभिन्न समूहों के साथ हस्ताक्षरित विभिन्न समझौतों का कार्यान्वयन।
  • असम और उसके पड़ोसी राज्यों के बीच सीमा विवाद
  • पूर्वोत्तर राज्यों के सुरक्षा संबंधी व्यय के दावे
  • राष्ट्रीय स्तर, सेक्टोरल स्तर से संबंधित विषय और बांग्लादेश एवं म्यांमार के साथ संयुक्त कार्य समूह की बैठक
  • पूर्वोत्तर राज्यों में कानून एवं व्यवस्था की स्थिति और उग्रवादी गतिविधियों की मॉनीटरिंग
  • आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति
  • पूर्वोत्तर क्षेत्र में विधि-विरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1967 तथा सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम 1958 का कार्यान्वयन
  • सेना/केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों द्वारा पूर्वोत्तर राज्यों में सिविक एक्शन कार्यक्रम
  • पूर्वोत्तर क्षेत्र के विभिन्न आतंकवादी समूहों के साथ शांति वार्ता
  • पूर्वोत्तर राज्यों में हेलीकॉप्टर सेवाएं
  • ब्रू प्रवासियों का पुनर्वास
  • अरुणाचल प्रदेश में चाकमा/हजोंग्स् से संबंधित मुद्दे
  • तिब्बती शरणार्थियों की सुरक्षा से संबंधित मुद्दे

पूर्वोत्तर प्रभाग के अधिकारी

पूर्वोत्तर प्रभाग के अधिकारी

दिनांक  31.01.2022 की स्थिति के अनुसार 

क्रम सं. नाम पदनाम कार्यालयी पता दूरभाष संख्या ई मेल आईडी
1. श्री पियूष गोयल अपर सचिव (एन ई) कमरा सं. 171-ए., नॉर्थ ब्‍लॉक, नई दिल्‍ली-110001 23092736 (का.) jsne[at]nic[dot]in
2. श्री एन.आर.मिंज उप सचिव (एनई.।) कमरा सं. 93-डी, नॉर्थ ब्‍लॉक, नई दिल्‍ली-110001 23092506 (का.) nr[dot]minz[at]nic[dot]in
3. श्री आर के पांडेय उप सचिव (पूर्वोत्तर-।।) कमरा सं. 222-C, नॉर्थ ब्लॉक, नई दिल्ली -110001 23092956(कार्यालय) raj.pandey@gov.in
4. श्री कृष्ण मोहन उप्पु उप सचिव (एन.ई.।।।) कमरा सं. 216-ए, नॉर्थ ब्‍लॉक, नई दिल्‍ली-110001 23092485 (का.) krishanm[dot]uppu[at]nic[dot]in
4. श्री वाई.पी. नौटियाल द्वितीय कमान अधिकारी(पूर्वो.) कमरा सं. 108-सी., नॉर्थ ब्‍लॉक, नई दिल्‍ली-110001 - yp[dot]nautiyal[at]gov[dot]in

 

प्रमुख पहलें/उपलब्धियां

प्रमुख पहलें/उपलब्धियां
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शांति प्रक्रिया की स्थिति

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पूर्वोत्तर में व्रिदोह

पूर्वोत्तर में व्रिदोह
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पूर्वोत्तर प्रभाग द्वारा प्रशासित स्कीमों का संक्षिप्त ब्यौरा

प्रस्तावना

प्रस्तावना

• पूर्वोत्तर क्षेत्र से संबंधित विकास एवं सुरक्षा के मुद्दों पर ध्यान केन्द्रित करने के लिए पूर्वोत्तर प्रभाग सृजित किया गया।

• देश के अन्य भागों से हटकर पूर्वोत्तर का रणनीतिक दृष्टि से महत्व पूर्ण स्थान है क्यों कि इन राज्यों की सीमाएं दूसरे देशों यथा बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार और चीन से लगती हैं। भू-भाग, सामाजिक-आर्थिक विकास की स्थिति और ऐतिहासिक तथ्यों यथा भाषा/जाति, जनजातीय शत्रुता, प्रवासन, स्थानीय संसाधनों पर नियंत्रण तथा दोहन एवं विमुखीकरण की व्यापक भावना के परिणामस्वरूप पूर्वोत्तर राज्यों में सुरक्षा स्थिति अस्थिर रही है। इसके परिणामस्वरूप विभिन्न भारतीय विद्रोही समूहों द्वारा हिंसा फैलाई गई है और कई प्रकार की मांगे रखी गई हैं।

• गृह मंत्रालय विभिन्न जातिगत समूहों की विकास संबंधी वास्तविक मांगों को पूरा करने तथा उनके कार्यों के प्रबंधन में स्वायत्ता की मांग को पूरा करने के सभी संभव कदम उठा रहा है। यद्यपि अवसंरचनात्मक विकास यथा सड़क, रेलिंग, विद्युत आपूर्ति, जला‍पूर्ति आदि पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय तथा अन्य संबंधित मंत्रालयों द्वारा देखें जाते हैं तथापि, सुरक्षा के सुदृढ़ीकरण, आतंकवाद से प्रभावित लोगों के पुनर्वास, बातचीत, विश्वास पैदा करने संबंधी उपायों के माध्य्म से भूमिगत संगठनों को मुख्य धारा में लाने आदि का कार्य पूर्वोत्तर प्रभाग द्वारा देखा जाता है। बांग्लादेश और म्यांंमार से संबंधित सुरक्षा मुद्दों के बारे में कूटनीतिक पहलें भी वहां सुरक्षा की स्थिति सुदृढ़ करने के लिए की जाती हैं।